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भारतीय संस्कृति और महिलाओ की यौन इच्छा


#महिलाओं की यौन इच्छाओं पर अंकुश

 

 औरत की प्रजनन की अद्भुत शक्ति के कारण, औरत को पुरुषों के अधीन होना पड़ा । संपत्ति एवं वंश आगे बढ़ाने के लिए औरतों को गुलामों की भांति प्रयोग किया गया।  जो औरत  सभ्यता के आरंभिक काल में यौन इच्छाओं के लिए स्वतंत्र थी, पुरुष के व्यक्तिगत स्वामित्व के कारण उसकी यौन इच्छाओं पर भी कंट्रोल किया जाने लगा।

 

#विकास क्रम में औरत का स्थान

 

अगर विकास क्रम में औरत को भोग की वस्तु में तब्दील

 न किया गया होता...

 

उसे कमोडिटी की तरह न बदला होता...

 

उसे सेक्स के नाम पर चरित्र, इज़्ज़त, मर्यादा से न बांधा होता....

 

उसे भी सेक्स की उतनी ही आज़ादी होती जितनी पुरुषों को है...(e.g. एक राजा की कईओं रानियां, पर किसी रानी के कईओं राजा नही आदि)

 

फ़ोटो गूगल से साभार

 

तो शायद #meetoo की जरूरत ही न होती....वो भी इसे पूरा एन्जॉय करती....????

 

(क्योकि सेक्स तो दोनो की जरूरत है,यह कब rape हो गई, पता ही नही चला)...

 

दूसरा, अभी, majority  #meetoo वाली, को तो पता भी नही, यह क्या है

 

क्योंकि उनके पास जीवन यापन के पूरे साधन तक नहीं, ऐसे में कोई अगर #meetoo करके भी #खैरात दे दे, तो भी भली????


 

"हम स्त्री हैं. हमें न किसी पर जय चाहिए, न पराजय, हमें अपनी वह जगह चाहिए जो हमारे लिए निर्धारित है."  -  महादेवी वर्मा

 

‘मातृसत्तात्मक समाज में स्त्री को आचरण की सुविधा थी तथा स्त्री से शुद्धता एवं शुचिता की अपेक्षा कम की जाती थी। व्यभिचार के विरुद्ध इतने कडे़ नियम नहीं थे। अब पितृसत्ता में चूंकि औरत पुरुष की सम्पत्ति थी, इसीलिए विवाह के पहले कौमार्य भंग न होनातथा आजीवन पतिव्रता बने रहना उसका परम धर्म बन गया। व्यभिचारिणी के लिए समाज में मृत्युदंड निश्चित किया गया’ (‘स्त्री उपेक्षिता’, पृ. 72)।

 

  लेखिका : - रंजीत कौर

नारीवादी एक्टिविटिस्ट


 


 

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sohan singh 2020-10-13 19:14:50

बहुत खूबसूरती से बात को प्रस्तुत किया गया है

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Aakash Rawat 2020-10-13 19:22:56

लोगो को जागरूक करने की एक अच्छी पहल

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आकाश 2020-10-13 22:57:09

आज आधी आबादी की समस्या है ये

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