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भारतीय समाज में मैरिटल रेप


 

                   हमारा भारतीय समाज महिला अधिकारों के प्रति बड़ा ही उदासीन है साथ ही उनके साथ हो रहे यौन शोषण तथा बलात्कार को लेकर और भी असंवेदनशील है। जब भी किसी लड़की/औरत की अस्मिता लूटी गई है लोगों की उंगलियां चक्करघिन्नी की तरह घूम कर पीड़िता की तरफ ही घूमती है। उसके कपड़ों, उसके रहन-सहन, उठने-बैठने के तरीकों पर चर्चाएं छिड़ जाती है और फिर इस तरह पीड़िता को ही दोषी बना दिया जाता है।

 

 

 

                   जब बलात्कार के लिए पीड़िताओं  को ही दोषी ठहराया जाता हो तो सोचिए उनका 'वैवाहिक बालात्कार' या 'मेरिटल रेप' के प्रति क्या मानसिकता होगी? भारतीय समाज में 'मेरिटल रेप' जैसा कुछ नहीं माना जाता, लड़कियों को होश संभालते ही पति को खुश रखने के लिए ट्रेंड किया जाता है। लड़की की इच्छा हो या न हो, वो थकी हो चाहे उदास हो, सेक्स पति का अधिकार है।

 

                    विश्व के 100 देशों में 'वैवाहिक बलात्कार' या 'मेरिटल रेप' जुर्म है परंतु दुःखद भारत उन 36 देशों में से एक है जहां आज भी 'वैवाहिक बलात्कार' या 'मेरिटल रेप' अपराध की श्रेणी में नहीं आता। जबकि 2013 में संयुक्त राष्ट्र समिति ने भारत सरकार को वैवाहिक बलात्कार/मेरिटल रेप को अपराध की श्रेणी में रखने का सुझाव दिया है।

 

 

क्या है बालात्कार की परिभाषा


महिला की इच्छा या मर्जी के बिना शारीरिक संबंध बनाना। महिला को मौत का खौफ दिखा या नजदीकी रिश्तेदारों को नुकसान पहुंचाने का डर दिखा कर महिला से ज़बरदस्ती सहमति से संबंध बनाना। महिला की सहमति तो हो लेकिन उस व्यक्ति की ब्याहता के भ्रम में। सहमति के वक़्त महिला की मानसिक स्थिति ठीक न हो या नशे में हो या ऐसी स्थिति में हो जिसमे वो कंसेंट समझने की स्थिति में न हो। लड़की की आयु 16 से कम हो जबकि इसके विपरीत अगर पत्नी 15 साल से भी छोटी हो तब भी उससे पति सेक्स कर सकता है जो रेप नहीं कहलाता। उपर्लिखित परिस्थितियों में किया गया सेक्स रेप कहलाता है।

 

 

भारतीय कानून क्या कहता है मेरिटल रेप पर


आईपीसी या भारतीय दंड विधान रेप की परिभाषा तो तय करता है परन्तु 'मेरिटल रेप' पर चुप्पी साध लेता है। एक तरफ तो 16 साल की लड़की से शारीरिक संबंध रेप की श्रेणी में आता है वहीं 12 साल से बड़ी लड़की के साथ पति सेक्स कर सकता है जिसमें लड़की की सहमति या असहमति का कोई मूल्य नहीं है, क्योंकि ये तो पति का अधिकार है मानो लड़की कोई इंसान नहीं बल्कि कोई प्रॉपर्टी या वस्तु हो।

 

 

क्या विवाद है मेरिटल रेप पर भारत में

कुछ लोगों के अनुसार एवं केंद्र सरकार की कोर्ट में दलील के अनुसार यदि वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में रखा गया तो शादी जैसी पवित्र संस्था खतरे में आ जायेगी, साथ ही पतियों को सताने के लिए औरतों को एक आसान औज़ार मिल जाएगा। जिसके बाद इस विषय पर विवाद गर्माता जा रहा है। हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत पति-पत्नी जिम्मेदारी तय की गई है जिसमे शारिरिक सम्बन्ध भी है। शारिरिक संबंध इनकार करने को क्रूरता माना गया है और डिवोर्स का आधार माना है।

 

 

आज 21वीं सदी में भी महिलाओं को अपने शरीर पर अपने अधिकार के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। जहां सहमति (consent) को प्रमुखता से स्थान मिलना चाहिए, वहां इसे धड़ल्ले से हटाया जा रहा है, नकारा जा रहा है जो कि चिंता का विषय है।

 

 

 

(कशिश नेगी)

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Soni 2022-02-19 06:31:19

Nice Subject ???? keep it up

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