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पति पत्नी और पंगा (वेब सीरीज)

 

 

हमारा समाज खुद को कितना ही मॉडर्न या आधुनिक बोलता या समझता रहे लेकिन सेक्स और जेंडर सेंसिटिविटी के मामले में उसकी आधुनिकता की पोल खुल जाती है। LGBTQI+ के विषय में आज भी हमारी सोसाइटी बात नहीं करना चाहती, होमो सेक्सुअलिटी को लेकर आज भी सोसाइटी होमोफोबिया से पीड़ित है।  जेंडर सेंसिटिविटी को लेकर हमारा समाज जरा भी सेंसेटिव नहीं है, न ही वो इस विषय पर जागरूक होना चाहता है और न ही कोई बात करना चाहता है। LGBTQI+ कम्युनिटी का हमेशा मज़ाक बनाया जाता है, अजी मज़ाक छोड़िये गाली बना के रख दिया है इस कम्युनिटी का।

 

                        "पति पत्नी और पंगा" इस सोसाइटी में रेगिस्तान में पानी की एक बूंद के समान है, जो लापरवाह और रूखे सोसायटी में  LGBTQI+ विषय को उठाता है, जेंडर सेंसिविटी को दिखाता है। जेंडर सेंसिटिव जैसे गंभीर विषय को कॉमेडी में लपेट कर दर्शकों तक लाई है ये सीरीज़, जिससे दर्शकों का आकर्षण सीरीज़ के प्रति बना रहे और उसका इंटरेस्ट बना रहे। 

 

                          सीरीज़ में LGBTQI+ कम्युनिटी के प्रति सोसाइटी की मानसिकता व इस कम्युनिटी से जुड़े पूर्वाग्रह तथा घृणा तो दिखाया ही गया है साथ में जेंडर इक्वलिटी और पितृसत्ता पर भी बात की गई है, "बच्चे पैदा करना, शादी करने का क्राइटेरिया कैसे हो सकता है? जो बच्चे पैदा नहीं कर सकती उसे शादी करने का हक नहीं? वो क्या नार्मल लाइफ नहीं जी सकती? 
     

                        कभी औरत सेक्स ऑब्जेक्ट होती है, कभी बच्चा पैदा करने की मशीन, अरे भाई औरत औरत भी तो होती है न!  उससे भी तो पूछो उसे क्या करना है, उसे सेक्स करना है कि नहीं, उसे बच्चे पैदा करना है कि नहीं"  जैसे डायलॉग से महिलाओं की स्थिति बताई गई है। 

 


                 कोर्ट सीन में बोला गया ये संवाद "इस समाज में मर्द के अलावा और किसी जेंडर की इज्जत नहीं है फिर चाहे वो ट्रांसजेंडर हो या औरत। मर्द के अलावा कोई किसी को इंसान ही नहीं समझता, इसीलिए इसे पितृसत्ता कहते है।" इशारा करते हैं कि LGBTQI+ कम्युनिटी ही नही अपितु महिलाएं भी पितृसत्ता से पीड़ित हैं। बेशक महिला सशक्तिकरण में हम अपनी पीठ खुद ही थपथपा कर स्वयं को शाबाशी दे कर गर्व से फूल कर कुप्पा हो जाएं लेकिन महिलाओं के प्रति आज भी घृणित मानसिकता समाज मे व्याप्त है इससे इनकार नहीं किया जा सकता। जज के कहने पर कि "लेकिन बेटा आज औरतें कहाँ से कहाँ पहुंच गई, तरक्की कर रही है" जैसे वाक्य पर नायिका का जवाब "सो कर आगे बढ़ी है, लोग तो यही कहते हैं न" जैसी सच्चाई सुन कर दिल भर आता है। 

 

             "पति पत्नी और पंगा" कुल मिला कर एक ट्रांसजेंडर की स्टोरी है, जिसके माध्यम से LGBTQI+ कम्युनिटी की पीड़ा दिखाई गई है, इस कम्युनिटी के प्रति समाज का रवैया दृष्टिकोण दिखाया गया है। ऐसे सेंसेटिव ईशु पर बहुत ही कम मूवी या सीरीज़ बनती है इसीलिए देखना तो बनता ही है। समाज मे इस कम्युनिटी को लेकर फैली भ्रांतियां तभी दूर होगी जब हम इस विषय पर खुल कर बात करेंगे। फिल्मी जगत को भी ऐसे सेंसेटिव विषय को सकारात्मक तरीके से दर्शकों को बीच समय समय पर लाना चाहिए। "पति पत्नी और पंगा" जैसी सीरीज़ एक अच्छा कदम है ऐसे सेंसेटिव विषय पर चर्चा करने के लिए। मुझे तो ये सीरीज़ खूब पसंद आई, आपको ये मूवी कैसी लगी? बताइएगा। और नहीं देखी तो देख लीजिए और अपने नजरिये से सीरीज के बारे बताइये।

 

 

(सेकंड नहीं लगता कि लोग राह चलते ऑब्जेक्टिफाय कर देते हैं, " अरे यार बहुत मोटी है, माचिस की गांडी जैसी पतली है, शक्ल देखी है चुड़ैल जैसी लगती है, अरे उसके तो बहुत छोटे हैं, लड़कों के बारे में तो ऐसा कोई नहीं कहत लड़कों के बारे में तो लोग कहते हैं उनकी सूरत नहीं सीरत देखनी चाहिए। लड़कियों की तो कोई सीरत नहीं देखता सीरत के अलावा सबकुछ देखता है।)