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नफरत में डूबा सुल्ली एप्प


सबसे महानतम सभ्यता, संस्कृति और  विश्व गुरु का दम्भ भरने वाले, महिलाओं को देवी समान बोलने वाले और लड़कियों को नवरात्रों में पूजने वाले कुछ लोग कितने ही दोगले और पाखंडी हैं ये समय-समय पर नज़र आता ही रहता है लेकिन इस बार तो इन पाखंडी और नफरत में पूर्णतया डूबे लोगों ने बेशर्मी  एवं नीचता की सभी हदें लांघ दी, जब "सुल्ली एप्प (Sulli App)" पर बीते रविवार सोमवार कुछ मुस्लिम महिलाओं की फ़ोटो और उनके ट्विटर हैंडल नीलामी के लिए सोशल मीडिया पर डाले गए। उन्हें एक सेक्स स्लेव के रूप में प्रदर्शित किया गया। उन्हें गैंग रेप (सामुहिक बलात्कार) की धमकी दी गयी।

 

सुल्ली (Sulli) शब्द महिलाओं के लिए यूज़ करने वाला एक बेहद ही घिनौना और अपमानजनक शब्द है।

 

"सुल्ली ओपन सोर्स एप्प" को गिटहब पर बनाया गया था जिसे अब हटा दिया गया है। कई ऑथेंटिक न्यूज़ पोर्टल और न्यूज़ चैनल की माने तो इसमें लगभग 80 मुस्लिम महिलाओं की फ़ोटो, पर्सनल इन्फॉर्मेशन तथा ट्विटर हैंडल की जानकारियां आपत्तिजनक कैप्शन के साथ दी गयी हैं। न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से मालूम चला है कि इन 80 (लगभग) मुस्लिम महिलाओं में कई पत्रकार भी हैं।  


 

एप्प पर लिखा है "फाइंड योर सुल्ली डील"

 

 

सोशल मीडिया कभी भी महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं रहा। अपनी बात बेबाकी, आज़ादी से रखती हुई मुखर महिलाओं को बार-बार लगातार ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है। ये ट्रोलिंग महिलाओं के विचारों पर नहीं अपितु महिलाओं के व्यक्तिगत/नितांत निजी बातों या बॉडी को लेकर किया जाता है। महिलाओं को लैंगिक गालियों के साथ-साथ रेप/बलात्कार की धमकी तक खुलेआम ये ट्रोलर्स देते रहते हैं। यही ट्रोलर्स धर्म-विशेष एवं जाति विशेष महिलाओं पर और अधिक आक्रामक एवं बेशर्म हो जाते हैं। रिकॉर्ड के अनुसार सबसे अधिक ट्रोलिंग का सामना मुस्लिम एवं दलित महिलाओं को करना पड़ता है।

 

 

क्या आप उन महिलाओं की पीड़ा और आक्रोश समझ सकते हैं? 

सोचिए कि आप किसी सुबह सुकून भरी नींद से जागें और आपको मालूम चले कि आपकी तो बोली लगाई जा रही हैं, आप पर भद्दे-भद्दे कमेंट किये जा रहे हैं, आपत्तिजनक टिप्पणियां की जा रही हैं, रेप/बालात्कार की धमकी/प्लान बनाये जा रहे हैं, तब? तब आप क्या महसूस करेंगे? छि: कितना घृणास्पद है ये सब। क्या आप इंसान कहलाने योग्य हैं? 

 

 

महिलाओं को अपनी नफरत का हथियार न बनाएं 

 

समाज से/पुरुषों से विनम्र निवेदन है कि कृपया औरतों को देवी और महानता की उपाधि न देकर सिर्फ और सिर्फ एक साधारण इंसान ही समझें। घर की इज्जत या भोग की वस्तु न समझें क्योंकि जब तक ऐसी मानसिकता रहेंगी औरतें यूँ ही प्रताड़ित रहेंगी फिर चाहे वो इस खेमे की हों या उस खेमे की क्योंकि पुरुष कभी भी लड़ाइयां अपने दम पर नहीं औरत की अस्मिता पर लड़ता है। महिलाएं साधारण मनुष्य जीवन सम्मानजनक जीना चाहती हैं कृपया उन्हें अपनी लड़ाई/नफरत का हथियार न बनाएं।

 

 

क्या ये मुस्लिम महिलाओं का मामला है? 

 

क्या ये मुस्लिम महिलाओं का मामला है? नहीं। अगर आपको ऐसा लगता है कि ये मुस्लिम महिलाओं का मामला है तो आप गलत हैं। वास्तव में ये महिलाओं का मामला है, बस आज उन्हें ट्रोल, प्रताड़ित, अपमानित किया जा रहा है कल आप भी इस नफरत/घृणा के चपेट में आ सकतीं है। क्योंकि ऐसी मानसिकता के लोग इंसान नहीं बल्कि एक मर्दनवादी मर्द हैं जो महिलाओं को सिर्फ एक 'वस्तु' के रूप में देखता है।

 

 

फ़िलहाल प्रशासन अपने कुम्भकर्णी नींद से जम्हाई लेते हुए जाग गया है (जाग रहा है) गिटहब ने अब 'सुल्ली ओपन सोर्स एप्प' को प्लेटफॉर्म से हटा दिया है और बताया कि उसने यूज़र्स का एकाउंट सस्पेंड कर दिया साथ ही मामले की जांच शुरू कर दी है। महिला आयोग ने भी पुलिस को नोटिस भेज दिया है। पुलिस भी थोड़ी हिली-डुली है तो शायद जल्द ही हरकत में भी आ ही जाएगी। 

 


'सुल्ली ओपन सोर्स एप्प' पर धीरे-धीरे एक्शन लिया जा रहा है। ऐसे मामले आगे भी होने के चान्सेस हैं जब तक कि हम अपनी घृणित मानसिकता से स्वतंत्र नहीं हो पाते। बस प्लेटफार्म और धर्म बदल जाएंगे, नहीं बदलेंगी तो शोषित और प्रताड़ित महिलाएं।